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Pithoragarh Monsoon Review: मानसून को लेकर प्रशासन अलर्ट, 298 संवेदनशील सड़क स्थल चिन्हित; 145 मशीनें तैनात

Pithoragarh Monsoon Review में मानसून की तैयारियों की समीक्षा हुई। जिले में 298 संवेदनशील सड़क स्थल चिन्हित और 145 JCB-Poclain मशीनें तैनात हैं।

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Pithoragarh Monsoon Review: पहाड़ी जिले पिथौरागढ़ में मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कलेक्ट्रेट सभागार में मानसून की तैयारियों और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जिले के 298 संवेदनशील सड़क स्थलों को लेकर विशेष निगरानी और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया गया।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि संवेदनशील स्थानों पर सड़क संपर्क बहाल रखने के लिए 145 जेसीबी और पोकलैंड मशीनें तैनात की गई हैं। इसके अलावा आपदा की स्थिति में आवागमन बहाल करने के लिए चार बैली ब्रिज भी तैयार रखे गए हैं।

298 संवेदनशील सड़क स्थलों पर रहेगी नजर

मानसून के दौरान भूस्खलन और मलबा आने से सड़कें बाधित होने की आशंका को देखते हुए जिले में 298 संवेदनशील सड़क स्थलों को चिन्हित किया गया है। इन स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और किसी भी तरह की आपात स्थिति में तुरंत मशीनरी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

अजय टम्टा ने अधिकारियों से कहा कि मानसून की शेष अवधि में सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। सड़क बंद होने की स्थिति में यातायात जल्द से जल्द बहाल करने को प्राथमिकता दी जाए, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित न हो।

145 जेसीबी-पोकलैंड मशीनें तैनात

सड़क मार्गों पर मलबा और बोल्डर आने की स्थिति से निपटने के लिए जिले में 145 जेसीबी और पोकलैंड मशीनें उपलब्ध रखी गई हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि संवेदनशील मार्गों पर सड़क बंद होने के बाद राहत कार्य शुरू करने में अनावश्यक देरी न हो।

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इसके साथ ही आपात परिस्थितियों में वैकल्पिक संपर्क बहाल करने के लिए चार बैली ब्रिज तैयार रखे गए हैं।

सभी तहसीलों में 24 घंटे एक्टिव कंट्रोल रूम

मानसून के दौरान किसी भी घटना की तत्काल जानकारी और राहत-बचाव के लिए जिले की सभी तहसीलों में 24 घंटे आपदा नियंत्रण कक्ष संचालित किए जा रहे हैं।

संचार व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर सैटेलाइट फोन और वायरलेस सेट भी उपलब्ध कराए गए हैं। अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती के साथ प्रशासन ने आपदा की स्थिति में सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान की व्यवस्था की है।

दूरस्थ इलाकों में तीन महीने का राशन स्टॉक

मानसून के दौरान सड़क संपर्क टूटने की स्थिति में दूरदराज के इलाकों में जरूरी सामान की कमी न हो, इसके लिए प्रशासन ने अग्रिम व्यवस्था की है।

दूरस्थ क्षेत्रों में तीन महीने का खाद्यान्न स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। वहीं, पेट्रोल पंपों पर 4,000 लीटर डीजल और 3,000 लीटर पेट्रोल रिजर्व रखा गया है। प्रत्येक रसोई गैस भंडार में 250 सिलेंडर सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है।

सभी तहसीलों में 50-50 खाद्यान्न राहत किट भी तैयार रखी गई हैं।

स्वास्थ्य विभाग भी तैयार, 41 एंबुलेंस उपलब्ध

मानसून के दौरान आपदा या स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट रखा गया है।

बैठक में बताया गया कि जिले में 108 सेवा समेत कुल 41 एंबुलेंस उपलब्ध हैं। विभिन्न विकासखंडों में मेडिकल टीमों की तैनाती के साथ जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक भी सुनिश्चित किया गया है।

4,710 लोगों को दिया गया आपदा प्रशिक्षण

आपदा के समय स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन की ओर से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

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अब तक 46 खोज एवं बचाव प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 4,710 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा NDRF, SDRF और फायर सर्विस समेत अन्य बचाव दलों को भी आपात स्थिति के लिए तैयार रखा गया है।

कुलागाड़ में क्षतिग्रस्त बैली ब्रिज की भी हुई समीक्षा

बैठक में हाल ही में हुई घटना की भी समीक्षा की गई। 19 अगस्त को धारचूला-गुंजी मोटर मार्ग के कुलागाड़ में पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से करीब 180 फीट लंबा बैली ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया था।

मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और पुलों को होने वाले नुकसान को देखते हुए अधिकारियों को ऐसे संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।

अजय टम्टा ने अधिकारियों को दिए सतर्क रहने के निर्देश

समीक्षा बैठक में अजय टम्टा ने पिथौरागढ़ को आपदा की दृष्टि से संवेदनशील जिला बताते हुए अधिकारियों को मानसून के दौरान पूरी तरह सतर्क रहने को कहा।

उन्होंने डेंजर जोन की निगरानी बढ़ाने, संवेदनशील ढलानों पर जरूरी कार्रवाई करने और सड़क बाधित होने की स्थिति में तत्काल मशीनरी तथा राहत दल मौके पर भेजने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में विभागीय समन्वय में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भी अलर्ट

बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा की अंतिम वापसी यात्रा को लेकर भी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार BRO, PMGSY, लोक निर्माण विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

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पिथौरागढ़ को मॉडल जिला बनाने पर जोर

मानसून तैयारियों के साथ बैठक में पिथौरागढ़ के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई। स्वास्थ्य, सड़क, पार्किंग, पेयजल, ड्रेनेज और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

अजय टम्टा ने कहा कि पिथौरागढ़ को स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में एक मॉडल जिले के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

फिलहाल मानसून के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील सड़क मार्गों को खुला रखना और किसी भी आपदा की स्थिति में राहत-बचाव को तेजी से मौके तक पहुंचाना है। 298 संवेदनशील सड़क स्थल और 145 मशीनों की तैनाती के साथ प्रशासन ने अपनी तैयारियों को मजबूत करने का दावा किया है।

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