Champawat News: चंपावत जिले के सीमांत क्षेत्र में सड़क सुविधा की कमी एक बार फिर ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनकर सामने आई है। तल्लादेश के बकोड़ा गांव में सड़क नहीं होने के कारण 80 वर्षीय दीवान सिंह को इलाज के लिए ग्रामीणों ने डंडे में बांधकर करीब 8 किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाया। लगातार बारिश के बीच ग्रामीणों को बुजुर्ग को अस्पताल ले जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सड़क तक पहुंचने के लिए 8 किमी का पैदल सफर
मोस्टा ग्राम पंचायत के बकोड़ा गांव निवासी दीवान सिंह के पैर में करीब छह दिन पहले कांटा या शीशा चुभ गया था। शुरुआत में मामूली चोट समझी गई, लेकिन कुछ दिनों बाद दर्द बढ़ने लगा। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाने का फैसला किया।
गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने बुजुर्ग को सड़क तक पहुंचाने की चुनौती थी। ऐसे में रवींद्र रावत, जगदीश सिंह, प्रियांशु और केदार ने बारी-बारी से बुजुर्ग को डंडे के सहारे उठाया और करीब 8 किलोमीटर पैदल सफर तय किया।
लगातार बारिश के कारण रास्ता भी काफी मुश्किल था। इसके बावजूद ग्रामीण करीब दो घंटे की मेहनत के बाद दीवान सिंह को सीम गांव तक सड़क पर पहुंचाने में सफल हुए।
सीम से जीप से टनकपुर ले जाया गया
सड़क तक पहुंचने के बाद बुजुर्ग को जीप के जरिए करीब 35 किलोमीटर दूर टनकपुर उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि बकोड़ा और आसपास के गांवों में इस तरह मरीजों को सड़क तक पहुंचाना कोई नई बात नहीं है।
ग्रामीणों के मुताबिक, किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या दुर्घटना में घायल होने पर पहले उसे डोली या अन्य साधनों से पैदल सड़क तक लाना पड़ता है। इसके बाद ही वाहन की सुविधा मिल पाती है।
सड़क नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी
बकोड़ा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता है। आपात स्थिति में समस्या और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बकोड़ा गांव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के विधानसभा क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं।
2012 में स्वीकृत हुई थी सड़क
ग्रामीणों के अनुसार मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क को वर्ष 2012 में स्वीकृति मिली थी। हालांकि, वन विभाग से संबंधित औपचारिकताओं के कारण सड़क निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ पाया।
वर्ष 2025 में तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष कुमार (Manish Kumar) ने सड़क की डीपीआर तैयार करने और वन अनापत्ति से जुड़ी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अभी तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा लाभ
ग्राम प्रधान रवींद्र रावत के मुताबिक सड़क बनने से अकेड़ी, मोस्टा, ग्वानी और बकोड़ा गांवों की 500 से अधिक आबादी को सीधा फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को इलाज, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। उनका यह भी कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण क्षेत्र से पलायन की समस्या बढ़ रही है।
18.30 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी गई
पीएमजीएसवाई चंपावत खंड के ईई वीरेंद्र सिंह बोहरा (Virendra Singh Bohra) के अनुसार मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क की लंबाई करीब 22.30 किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि सड़क से संबंधित औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं और 18.30 करोड़ रुपये की डीपीआर स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजी गई है।
उन्होंने बताया कि वन प्रस्ताव भी अपलोड किया जा चुका है। केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद सड़क निर्माण का काम शुरू किया जाएगा।
फिलहाल, बकोड़ा और आसपास के ग्रामीणों के लिए सड़क निर्माण का इंतजार जारी है। 80 वर्षीय बुजुर्ग को बारिश के बीच 8 किलोमीटर तक डंडे के सहारे ले जाने की घटना ने एक बार फिर सीमांत क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
