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आबादी कम, लेकिन सेना में बड़ा योगदान, उत्तराखंड से आते हैं करीब 17% सैनिक

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उत्तराखंड सेना में 17 प्रतिशत सैनिक: उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी कहा जाता है और इसकी एक बड़ी वजह देश की सैन्य सेवा में यहां के लोगों की भागीदारी है। देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि देश के करीब 17 प्रतिशत सैनिक उत्तराखंड से आते हैंराज्य की आबादी भले ही कम है, लेकिन सेना में इसका योगदान काफी अहम है।

यह बात 14वीं गढ़वाल राइफल्स के 50वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में कही गई। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और सेना मेडल प्राप्त जवानों को भी सम्मानित किया गया।

देहरादून में मनाया गया 14वीं गढ़वाल राइफल्स का 50वां स्थापना दिवस

गढ़ी कैंट स्थित दून सैनिक इंस्टीट्यूट में 14वीं गढ़वाल राइफल्स एक्स-सर्विसमैन एसोसिएशन की ओर से बटालियन का स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किया गया।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी।

समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और उनके परिवारों से जुड़े लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का माहौल सैन्य गौरव और पुरानी यादों से जुड़ा रहा।

1976 में हुई थी 14वीं गढ़वाल राइफल्स की स्थापना

गणेश जोशी ने बताया कि 14वीं गढ़वाल राइफल्स की स्थापना 1 सितंबर 1976 को हुई थी। बटालियन की स्थापना कर्नल सौंधी के नेतृत्व में हुई थी।

दिलचस्प बात यह है कि गणेश जोशी खुद भी इस बटालियन में सिपाही के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने समारोह के दौरान अपने सैन्य जीवन के अनुभव भी साझा किए।

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उन्होंने कहा कि सैन्य जीवन में मिले अनुशासन और बटालियन में बिताए समय का उनके राजनीतिक जीवन पर भी प्रभाव रहा है। उनके मुताबिक, इसी सैन्य पृष्ठभूमि ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में भी अनुशासन और सेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने में मदद की।

‘गढ़वाल राइफल्स वीरता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक’

मंत्री गणेश जोशी ने गढ़वाल राइफल्स को वीरता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीरों की भूमि है और राज्य के लोगों ने देश की सुरक्षा में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की आबादी देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है, लेकिन सेना में प्रदेश के लोगों की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है।

कार्यक्रम में सामने रखा गया 17 प्रतिशत सैनिकों का आंकड़ा उत्तराखंड के सैन्य योगदान को समझने के लिहाज से खास रहा।

वीर नारियों और सेना मेडल विजेताओं का सम्मान

समारोह में देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवारों की महिलाओं यानी वीर नारियों को भी सम्मानित किया गया।

लक्ष्मी देवी, दीपा रावत, बसंती देवी, आशा देवी, चिमुड़ी देवी और दीपा देवी को सम्मानित किया गया। इसके अलावा सेना मेडल प्राप्त राइफलमैन कर्मेन्द्र सिंह, सूबेदार प्रेम सिंह और हवलदार खिलाफ सिंह को भी सम्मान मिला।

ऐसे सम्मान समारोह सिर्फ पुरस्कार देने तक सीमित नहीं होते। इनके जरिए उन परिवारों और सैनिकों के योगदान को सार्वजनिक रूप से याद किया जाता है, जिन्होंने देश की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बटालियन फिलहाल भटिंडा में तैनात

14वीं गढ़वाल राइफल्स की बटालियन वर्तमान में भटिंडा में तैनात है। सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्तता के कारण मंत्री गणेश जोशी वहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

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इसके बाद देहरादून में पूर्व सैनिकों के साथ बटालियन का 50वां स्थापना दिवस मनाया गया। समारोह के दौरान गणेश जोशी ने पूर्व सैनिकों के साथ पारंपरिक नृत्य में भी हिस्सा लिया और बटालियन से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा किया।

पूर्व सैनिकों के लिए योजनाओं का भी किया जिक्र

कार्यक्रम के दौरान सैनिक कल्याण मंत्री ने पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने वन रैंक वन पेंशन, जिला स्तर पर पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए नोडल अधिकारी और शहीद परिवारों को नौकरी देने जैसी योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि सैन्यधाम का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही इसका लोकार्पण किया जाएगा।

उत्तराखंड की सैन्य परंपरा पर एक नजर

उत्तराखंड में सेना से जुड़ाव कोई नई बात नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों के कई परिवारों में पीढ़ियों से युवा सैन्य सेवा को करियर के तौर पर चुनते रहे हैं। ऐसे में 14वीं गढ़वाल राइफल्स जैसी बटालियन का 50 साल पूरा करना केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि उत्तराखंड के लोगों से जुड़ी भावनाओं का भी विषय है।

देहरादून में आयोजित इस समारोह में एक तरफ बटालियन की पांच दशक लंबी यात्रा को याद किया गया, वहीं दूसरी तरफ पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के योगदान को सम्मान दिया गया।

पत्रकार की राय

उत्तराखंड का सैन्य योगदान अक्सर यहां के लोगों के लिए गर्व का विषय रहा है। इस कार्यक्रम में सामने आया करीब 17 प्रतिशत का आंकड़ा इसी योगदान की ओर ध्यान खींचता है। हालांकि, किसी भी आंकड़े को उसके आधिकारिक स्रोत और संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।

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14वीं गढ़वाल राइफल्स का 50वां स्थापना दिवस इसलिए भी खास है क्योंकि इस बटालियन से जुड़े पूर्व सैनिक आज भी इसकी विरासत से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। गणेश जोशी का खुद इसी बटालियन में सिपाही रहना समारोह को और व्यक्तिगत बनाता है।

एक बात साफ है कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा केवल वर्दी पहनने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे परिवारों का त्याग, वीर नारियों का संघर्ष और पीढ़ियों से चली आ रही देशसेवा की भावना भी जुड़ी हुई है।

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