Roorkee Farmers Protest: रुड़की में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड किसान मोर्चा ने बुधवार को तहसील परिसर स्थित ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। किसानों ने इकबालपुर चीनी मिल से बकाया गन्ना भुगतान, स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक और कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त करने समेत कई मांगें उठाई हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि गन्ने का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है, जिसके कारण किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं स्मार्ट मीटर लगाए जाने को लेकर भी किसानों में नाराजगी है। धरने के दौरान किसानों ने सरकार और प्रशासन से उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई करने की मांग की।
इकबालपुर चीनी मिल से बकाया भुगतान की मांग
रुड़की क्षेत्र में इकबालपुर चीनी मिल से गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा किसानों के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। किसानों का कहना है कि गन्ना बेचने के बाद समय पर भुगतान नहीं मिलने से खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
किसानों के मुताबिक खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में गन्ने का भुगतान समय पर नहीं होने का सीधा असर उनके परिवार और अगली फसल की तैयारी पर पड़ता है।
इसी वजह से किसान संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि चीनी मिल से जुड़े बकाया भुगतान का जल्द से जल्द निस्तारण कराया जाए।
स्मार्ट मीटर को लेकर भी किसानों में नाराजगी
धरने में किसानों ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने का भी विरोध किया। किसान मोर्चा का कहना है कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।
किसान नेताओं का तर्क है कि कृषि क्षेत्र में बिजली की व्यवस्था को लेकर पहले से कई समस्याएं हैं और स्मार्ट मीटर लगाए जाने से किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। संगठन ने प्रशासन से किसानों के क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
यह मुद्दा रुड़की क्षेत्र में नया नहीं है। इससे पहले भी किसान संगठन स्मार्ट मीटर के विरोध में आंदोलन कर चुके हैं।
ट्यूबवेल की बिजली मुफ्त करने की मांग
किसानों ने कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त करने की मांग भी उठाई है। किसान नेताओं ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी किसानों के ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त किए जाने की मांग रखी।
किसानों का कहना है कि सिंचाई खेती की सबसे जरूरी जरूरतों में से एक है। बिजली की लागत बढ़ने से खेती की लागत भी बढ़ती है। ऐसे में ट्यूबवेल की बिजली पर राहत मिलने से किसानों को आर्थिक रूप से मदद मिल सकती है।
सुरक्षा के नाम पर कथित वसूली रोकने की मांग
धरने के दौरान किसानों ने सुरक्षा के नाम पर की जा रही कथित वसूली का मुद्दा भी उठाया। किसान नेताओं ने ऐसी वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी आंदोलन कर चुके हैं किसान
रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में किसान संगठन इससे पहले भी गन्ना भुगतान और स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर आंदोलन कर चुके हैं।
अक्टूबर 2025 में भी उत्तराखंड किसान मोर्चा के कार्यकर्ता ट्रैक्टरों के साथ रुड़की पहुंचे थे। उस दौरान किसानों ने महापंचायत आयोजित कर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी। स्मार्ट मीटर का विरोध और गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा उस आंदोलन में भी प्रमुख रहा था।
अब एक बार फिर किसानों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि इन मुद्दों को लेकर किसानों का असंतोष अभी खत्म नहीं हुआ है।
जब तक कार्रवाई नहीं, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक धरना जारी रखा जाएगा। फिलहाल आंदोलन के केंद्र में चार प्रमुख मुद्दे हैं—इकबालपुर चीनी मिल से बकाया गन्ना भुगतान, स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक, ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त करना और सुरक्षा के नाम पर कथित वसूली पर रोक।
अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए यदि समाधान निकलता है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, लेकिन मांगों पर जल्द सहमति नहीं बनने की स्थिति में प्रदर्शन आगे भी जारी रहने की संभावना है।
किसान आंदोलन से जुड़े प्रमुख मुद्दे
- इकबालपुर चीनी मिल से बकाया गन्ना भुगतान जल्द कराया जाए।
- किसानों के क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए।
- कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त की जाए।
- सुरक्षा के नाम पर कथित वसूली पर रोक लगाई जाए।
- किसानों की लंबित समस्याओं का प्रशासन स्तर पर समाधान किया जाए।
पत्रकार की नजर से: रुड़की में किसानों का यह आंदोलन केवल एक मांग तक सीमित नहीं है। गन्ना भुगतान, बिजली की लागत और स्मार्ट मीटर जैसे मुद्दे सीधे किसानों की रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। खासकर गन्ना भुगतान में देरी का असर अगली फसल की तैयारी तक पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी होगा कि वह किसानों की शिकायतों को सुने और जिन मामलों में वास्तविक समस्या है, उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे। वहीं किसानों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी संबंधित विभागों द्वारा निष्पक्ष जांच जरूरी है।
