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Badrinath News: चढ़ावे में हेराफेरी मामले में नया मोड़, निलंबित कर्मचारी की पत्नी ने जांच समिति के सामने उठाए कई सवाल

बदरीनाथ धाम चढ़ावे में कथित हेराफेरी मामले में नया मोड़ आया है। गिरफ्तार प्रमोद नौटियाल की पत्नी ने जांच समिति के सामने बरामदगी, CCTV और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

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चमोली: बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और भेंट सामग्री में कथित हेराफेरी के मामले में करीब डेढ़ महीने बाद एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। निलंबित एवं गिरफ्तार बीकेटीसी कार्मिक प्रमोद नौटियाल की पत्नी मीतू नौटियाल ने 21 अगस्त 2026 को गढ़वाल मंडल आयुक्त और जांच समिति के अध्यक्ष के समक्ष लिखित बयान देकर मामले की जांच और कथित बरामदगी को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

मीतू नौटियाल, जो स्वयं असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि उनके पति को एक साजिश के तहत मामले में फंसाया गया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई, कमरे की तलाशी, सीसीटीवी फुटेज और कथित बरामदगी की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की है। हालांकि, ये सभी आरोप उनके लिखित बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

कमरे की तलाशी को लेकर पत्नी ने उठाए सवाल

मीतू नौटियाल ने जांच समिति के सामने सबसे अहम सवाल बदरीनाथ की नीलकंठ धर्मशाला के उस कमरे को लेकर उठाया, जहां प्रमोद नौटियाल ठहरे थे। उनके मुताबिक, प्रमोद ने यह कमरा 5 जुलाई को ही छोड़ दिया था और कथित तलाशी के दौरान कमरा सील नहीं था।

उन्होंने जांच समिति से धर्मशाला के रजिस्टर की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रजिस्टर से यह पता लगाया जा सकता है कि 5 जुलाई के बाद तलाशी होने तक कमरे में कौन-कौन लोग ठहरे थे।

पत्नी ने आशंका जताई कि कमरे से बरामद बताई जा रही नकदी, नेपाली मुद्रा और अन्य सामान किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा वहां रखा गया हो सकता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

परिवार की संपत्ति को लेकर भी दिया स्पष्टीकरण

बयान में मीतू नौटियाल ने परिवार की संपत्ति को लेकर उठने वाले संभावित सवालों पर भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि परिवार की संपत्ति से जुड़ी जानकारी जांच अधिकारी को पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है।

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उनके अनुसार, परिवार के पास बदरीपुर की पुरानी जमीन बेचकर डोईवाला के आसपास करीब 60 लाख रुपये में खरीदे गए दो प्लॉट और विभागीय ऋण से रायपुर क्षेत्र में खरीदी गई करीब पांच लाख रुपये की जमीन के अलावा कोई अन्य संपत्ति नहीं है।

उन्होंने जांच समिति से परिवार की संपत्ति संबंधी दस्तावेजों को भी जांच का हिस्सा बनाने का अनुरोध किया है।

CCTV फुटेज को लेकर भी सवाल

मीतू नौटियाल ने सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनके बयान के मुताबिक, फुटेज में प्रमोद नौटियाल को रुपये निकालते हुए नहीं देखा गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रुपये और सोने समेत अन्य सामग्री को अलग करके कहीं और रखे जाने की संभावना की जांच की जानी चाहिए। हालांकि, यह आरोप भी फिलहाल जांच का विषय है।

इस मामले में सीसीटीवी फुटेज, उसकी पूरी रिकॉर्डिंग, समय और उससे जुड़े अन्य साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

12 जुलाई की रात घर पहुंची पुलिस पर भी आरोप

प्रमोद नौटियाल की पत्नी ने 12 जुलाई की रात हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, रात करीब 10 बजे कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में घर पहुंचे थे और प्रमोद को बयान लेने के लिए चौकी ले जाने की बात कही गई थी।

मीतू का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घर की पूजा में रखी शालिग्राम शिला भी अपने साथ ली और बाद में उसे प्रमोद से बरामद दिखाया गया।

परिवार का कहना है कि प्रमोद को चौकी ले जाने की बात बताई गई थी, लेकिन बाद में उन्हें नेहरू कॉलोनी थाने में होने की जानकारी मिली। स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर परिवार की ओर से उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट तक दर्ज कराई गई। बाद में पता चला कि उन्हें बदरीनाथ ले जाया गया है।

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इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।

बदरीनाथ भेजे जाने पर भी उठे सवाल

मीतू नौटियाल ने प्रमोद को बदरीनाथ भेजे जाने और उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां दिए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने जांच समिति से पूछा कि निजी सहायक के रूप में देहरादून में कार्यरत प्रमोद को पहली बार बदरीनाथ क्यों भेजा गया और उन्हें प्रोटोकॉल अधिकारी की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी ने प्रमोद को कथित तौर पर रुपये या भेंट सामग्री लेते हुए देखा था, तो तत्काल नजदीकी पुलिस चौकी को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई।

उनके अनुसार, प्रमोद 2 से 5 जुलाई तक बदरीनाथ में मौजूद थे, ऐसे में उसी दौरान तलाशी क्यों नहीं ली गई और गिरफ्तारी के बाद बदरीनाथ ले जाते समय कमरे की तलाशी क्यों नहीं की गई।

कर्मचारियों की नाराजगी का भी किया जिक्र

मीतू नौटियाल ने अपने बयान में कुछ कर्मचारियों की कथित नाराजगी का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि प्रमोद को प्रोटोकॉल अधिकारी समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने के कारण कुछ कर्मचारी उनसे नाराज थे।

उन्होंने प्रमोद की सेवा संबंधी गोपनीय आख्या यानी सीआर का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि वर्ष 2025 तक की उनकी सेवा आख्या से उनके काम के प्रति अधिकारियों की राय का पता लगाया जा सकता है।

अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम

मीतू नौटियाल के लिखित बयान के बाद मामले में कई नए जांच बिंदु सामने आए हैं। जांच समिति के सामने अब यह स्पष्ट करना अहम होगा कि धर्मशाला के कमरे की तलाशी किस परिस्थिति में हुई, उस समय कमरा किस स्थिति में था और उसके बाद वहां कौन-कौन लोग ठहरे थे।

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इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज की पूरी रिकॉर्डिंग, कथित बरामदगी की प्रक्रिया, शालिग्राम शिला से जुड़ी कार्रवाई और पुलिस द्वारा तैयार किए गए दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।

दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई और मामले में हुई गिरफ्तारियां भी जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। ऐसे में किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य मानने के बजाय जांच के निष्कर्ष और अदालत की प्रक्रिया का इंतजार करना जरूरी है।

पत्नी ने निष्पक्ष जांच से न्याय की उम्मीद जताई

मीतू नौटियाल ने अपने बयान में कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच होने पर पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। उन्होंने जांच समिति से उनके द्वारा उठाए गए सभी सवालों और दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है।

अब निगाहें जांच समिति की कार्रवाई पर हैं। यदि कमरे के रिकॉर्ड, सीसीटीवी, बरामदगी और पुलिस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच होती है, तो इससे मामले में लगाए जा रहे आरोपों और बचाव पक्ष के दावों के बीच वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है।

नोट: इस खबर में मीतू नौटियाल की ओर से लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। मामले में पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष आने बाकी हैं।

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