हरिद्वार। उत्तराखंड में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत हरिद्वार पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। श्यामपुर थाना पुलिस ने बिहार के नालंदा और नवादा से जुड़े कथित मगध साइबर गैंग का खुलासा करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपितों के पास से बड़ी संख्या में बैंक कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेनदेन के सुराग भी मिले हैं।
चेकिंग के दौरान पकड़े गए पांचों आरोपी
पुलिस के अनुसार, श्यामपुर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान एक स्विफ्ट कार को रोका गया। कार में पांच लोग सवार थे। तलाशी के दौरान एक बैग से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड और मोबाइल फोन मिले।
संदिग्ध सामान मिलने के बाद पुलिस ने आरोपितों से पूछताछ शुरू की और बरामद मोबाइल व अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच की। इसके बाद साइबर ठगी से जुड़े कई अहम सुराग सामने आए।
35 एटीएम कार्ड और 14 बैंक पासबुक बरामद
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से कुल 35 एटीएम कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड और 18 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
इसके अलावा पुलिस को दो लैपटॉप, 10 एटीएम कवर, पैन कार्ड और 37,500 रुपये नकद भी मिले हैं।
बरामद पासबुक में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एसबीआई, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक और द नैनीताल बैंक समेत कई बैंकों के खाते शामिल हैं।
ऐसे चल रहा था खातों का कथित नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपित कथित तौर पर स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम हासिल करते थे। इन खातों के एटीएम पिन और यूपीआई से जुड़ी जानकारी पर उनका नियंत्रण रहता था।
साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इन बैंक खातों में मंगाए जाने के बाद अलग-अलग खातों में यूपीआई के माध्यम से ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद एटीएम या कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए रकम निकालने की बात सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, निकाली गई रकम को नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच कमीशन के आधार पर बांटा जाता था।
मोबाइल और लैपटॉप से मिले अहम डिजिटल सबूत
जांच के दौरान पुलिस को आरोपितों के मोबाइल फोन में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। प्रारंभिक जांच में WhatsApp चैट, बैंक अकाउंट नंबर, खाताधारकों के नाम, QR कोड और लेनदेन से जुड़ी बातचीत सामने आई है।
मोबाइल की गैलरी में कई बैंक पासबुक और खातों से संबंधित दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिली हैं। पुलिस अब इन डिजिटल साक्ष्यों को खंगालकर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
नालंदा और नवादा से जुड़े लोगों की भी जांच
पूछताछ में बिहार के नालंदा और नवादा से जुड़े कुछ अन्य लोगों की भूमिका के संकेत मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं और साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य लोग कौन हैं।
बैंक स्टेटमेंट, KYC दस्तावेज, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच के बाद पुलिस को पूरे मनी ट्रेल का पता चलने की उम्मीद है।
पांच आरोपित गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कृष्णा पांडे और चंद्रमणि कुमार निवासी नालंदा/नवादा, बिहार तथा सन्नी और चंदन पांडे निवासी हरिद्वार समेत पांच आरोपित शामिल हैं।
पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज
यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय की ओर से चलाए जा रहे साइबर क्राइम हॉटस्पॉट अभियान के तहत की गई। बड़ी संख्या में बैंक कार्ड और डिजिटल दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस इस मामले को साइबर अपराध से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के रूप में जांच रही है।
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का फोकस संदिग्ध खातों, डिजिटल लेनदेन और कथित साइबर ठगी की रकम की पूरी मनी ट्रेल पता करने पर है।
