16 करोड़ की लागत से बना पुल खुलने के महज 16 दिन बाद धंसा, जांच रिपोर्ट में सामने आई कई स्तरों की लापरवाही
देहरादून के प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल के एप्रोच मार्ग के धंसने के मामले में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। शुक्रवार शाम जारी आदेश में शासन ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के तीन अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही डिजाइन कंसल्टेंट और प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
16 करोड़ का पुल, 16 दिन में धंसा
टौंस नदी पर बना यह पुल पुराने देहरादून-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और महज 16 दिन पहले ही आवागमन के लिए खोला गया था। भारी बारिश के चलते पुल के एप्रोच मार्ग में बड़ा गड्ढा हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। 16 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल की गुणवत्ता को लेकर घटना के बाद सवाल खड़े हो गए थे।
हादसे के बाद शासन ने विभागीय स्तर पर जांच के आदेश दिए थे और क्षेत्रीय मुख्य अभियंता से तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए शासन ने तीन अभियंताओं को निलंबित किया।
किन अभियंताओं पर गिरी गाज
- राजेश कुमार — अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून
- अमित त्यागी — सहायक अभियंता, प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून
- नवीन गैरोला — कनिष्ठ अभियंता, प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून
निलंबन आदेश में तीनों पर तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंध की शर्तों के अनुपालन में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। यह कार्रवाई उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 के तहत की गई है, क्योंकि मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए बड़ी विभागीय कार्रवाई की आशंका जताई गई है। निलंबन अवधि में तीनों अभियंता मुख्य अभियंता कार्यालय, पीडब्ल्यूडी देहरादून से संबद्ध रहेंगे, नियमानुसार निर्वाह भत्ता पाएंगे और बिना पूर्वानुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पुल के डिजाइन कंसल्टेंट ने नदी के मार्ग में संभावित बदलाव का अध्ययन किए बिना ही डिजाइन तैयार कर दिया। नदी के घुमावदार स्वभाव और उसके ढलान का भी समुचित अध्ययन नहीं किया गया। इन्हीं खामियों के चलते नदी का पूरा बहाव पुल के एक ही हिस्से की ओर केंद्रित हो गया, जिससे किनारे वाले हिस्से में भारी कटाव हुआ। इस कटाव से एप्रोच रोड के नीचे खोखला स्थान बन गया, जो अंततः धंस गया।
रिपोर्ट में मुख्य जिम्मेदारी डिजाइन कंसल्टेंट के साथ-साथ प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट की भी तय की गई है, जिसने डिजाइन की इन खामियों को पकड़ने में चूक की। शासन ने दोनों कंसल्टेंट के खिलाफ भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और जांच रिपोर्ट में सुझाए गए सुरक्षात्मक उपायों के आधार पर एक समयबद्ध कार्ययोजना मांगी है, ताकि भविष्य में पुल को सुरक्षित रखा जा सके।
गौरतलब है कि यह इस पुल के साथ हुआ दूसरा हादसा है। इससे पहले टौंस नदी के तेज बहाव में एक अस्थायी पुलिया भी धंस चुकी थी, जिसके बाद पुनर्निर्मित मुख्य पुल पर वाहनों का संचालन शुरू कराया गया था।




